Monday, April 21, 2008

आज की आखिरी...

रिश्ते खूनी, मरासिम रूहानी
सबकी अपनी अपनी कहानी,
एक चाय, तमाम सुखन
एक काफ़ी, तमाम अदब
आधे घंटे, कुछ लम्हे
बातें, केवल बातें
यहाँ की बातें,
वहां की बातें,
तेरी बातें,
मेरी बातें,
बातें, केवल बातें.
बातों से बनती बात,
बातों से सजती बात,
जादू सा नशा, या
नशे सा जादू-
बातों का नशा,
बातों का जादू.
बिखरती बातें,
छूटती बातें,
सिसकती बातें,
कसकती बातें,
क्यों हैं!! इतनी बातें..
आदि से बातें,
अंत तक बातें,
चलते चलते बातें,
रुकते रुकते बातें,
बातों से खुलते दिमाग,
बातों से सुलझते दिमाग.
फिर,
बिन बातों की बातें,
बातों के बीच की बातें,
खमोशी की बातें,
आंखों में बातें,
हाथों में बातें,
अंगुलियों में बातें,
कहाँ तक बातें,
बस बातें ही बातें,
और,
इतनी सारी बातों के बाद की,
खमोशी, तन्हाई और याद-
हाल में गुजरते माज़ी की-
चुप्पी बहुत देर तक....
बस,
चुप्पी.

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